निःशुल्क योग शिविर : योग से संस्कार और चरित्र का निर्माण संभव: पू स्वामी जी

आयुर्वेदिक चिकित्सकों की श्रृंखला तैयार कर राष्ट्रहित में की है समर्पित: पू.स्वामी जी

कासगंज (उत्तर प्रदेश)। योगऋषि परम पूज्य स्वामी रामदेव जी महाराज ने कहा कि योग से संस्कार और चरित्र का निर्माण भी संभव है। देश को गौरवमयी बनाना है तो योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाएं। अब तक देश में संस्कार विहीन शिक्षा का चलन था, लेकिन अब नई शिक्षा नीति से विश्व में देश का गौरव बढ़ेगा। इसमें उन पहलुओं को सामने लाया गया है, जो अब तक अलोपित थे।
     उन्होंने योग पर जोर देते हुए कहा कि शरीर के गम्भीर रोग इससे दूर किए जा सकते हैं। कैंसर, शुगर, हृदयाघात, थाईराइड सहित अन्य गम्भीर रोगों का एक मात्र उपचार योग है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद और योग की पद्धति को जीवन में उतारने से जटिलता सरलता में बदल जाएगी। एलोपैथी एवं अन्य पैथियों को प्रश्न चिन्ह लगाते हुए उन्होंने आयुर्वेद एवं योग को सर्वश्रेष्ठ बताया। उन्होंने कहा कि योग को घर-घर पहुंचाने के बाद उनका उद्देश्य शिक्षा की क्रांति लाना है। इससे देश की नींव मजबूत होगी। अब तक मैकाले की शिक्षा का चलन था, लेकिन अब नई शिक्षा पद्धति में अमूल-चूल सुधार हुए हैं। सांस्कारिक शिक्षा को प्राथमिकता दी गई है। उन पहलुओं को शिक्षा से जोड़ा गया है जो हमारी संस्कृति के धरोहर हैं। उन्होंने योग से दिन की शुरूआत करने का आह्वान किया। भारतीय शिक्षा बोर्ड के चेयरमैन आदरणीय श्री नागेंद्र प्रताप जी, मुख्य केंद्रीय प्रभारी श्री राकेश कुमार जी, सुनील शास्त्री (राज्य प्रभारी, भारत स्वाभिमान, उत्तर प्रदेश-पश्चिम) श्री जे.सी. चतुर्वेदी जी एवं कार्यकर्तागण उपस्थित मौजूद रहे।
   परम पूज्य स्वामी जी महाराज ने सरकार को राष्ट्रवादी बताया। उन्होंने कहा कि सनातन मूल्यों की रक्षा करने वाली सरकार है। देश को गौरव प्रदान कर रही है। नई शिक्षा नीति के निर्माण से विश्व में देश का गौरव बढ़ेगा। सभी देश भारतीय शिक्षा का अनुकरण करेंगे। बहुत जल्द ही ऐसा परिदृश्य सामने आने वाला है।

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