संन्यासी दीक्षा: राश्ट्रनिर्माण कर रही पतंजलि

संन्यासी दीक्षा: राश्ट्रनिर्माण कर रही पतंजलि

  ऋषि ग्राम में यज्ञ के साथ शुरू हुआ ‘संन्यास दीक्षा शिविर’ हरिद्वार। भारत को विश्व की एकमात्र आध्यात्मिक शक्ति बनाने की अवधरणा को लेकर योगर्षि स्वामी रामदेव जी महाराज ने पतंजलि योगपीठ स्थित ऋषिग्राम में चतुर्वेद महापारायण यज्ञ के साथ संन्यास दीक्षा शिविर की विधिवत शुरूआत की। शिविर में देश के विभिन्न प्रांतों से आए 92 जीवनदानी सेवाव्रती भाग ले रहे हैं। जिसमें 41 महिलाएं व 51 पुरुष शामिल हैं। जिन्हें 25 मार्च को रामनवमी पर श्रद्धेय स्वामी जी महाराज हरकी पैड़ी पर खुद संन्यास दीक्षा देकर राष्ट्र को…

 

ऋषि ग्राम में यज्ञ के साथ शुरू हुआ ‘संन्यास दीक्षा शिविर’

हरिद्वार। भारत को विश्व की एकमात्र आध्यात्मिक शक्ति बनाने की अवधरणा को लेकर योगर्षि स्वामी रामदेव जी महाराज ने पतंजलि योगपीठ स्थित ऋषिग्राम में चतुर्वेद महापारायण यज्ञ के साथ संन्यास दीक्षा शिविर की विधिवत शुरूआत की। शिविर में देश के विभिन्न प्रांतों से आए 92 जीवनदानी सेवाव्रती भाग ले रहे हैं। जिसमें 41 महिलाएं व 51 पुरुष शामिल हैं। जिन्हें 25 मार्च को रामनवमी पर श्रद्धेय स्वामी जी महाराज हरकी पैड़ी पर खुद संन्यास दीक्षा देकर राष्ट्र को समर्पित करेंगे। श्रद्धेय स्वामी जी महाराज ने खुद भी इसी दिन संन्यास लिया था।

प्रातःकाल बारिश के बीच ऋषिग्राम में श्रद्धेय स्वामी जी महाराज के मंत्रोचारण के साथ 92 जीवनदानी सेवाव्रतियों के साथ 100 से अधिक सेवाव्रतियों ने यज्ञ में आहुति डाली। श्रद्धेय स्वामी जी महाराज ने कहा कि वर्ष 2050 तक पतंजलि का एक हजार जीवनदानी सेवाव्रतियों को राष्ट्रसेवा मंे समर्पित करने का लक्ष्य है। उन्होंने कहा ये जीवनदानी सेवाव्रती भारत को अध्यात्मिक राष्ट्र और विश्व को आध्यात्मिक विश्व बनाने को संकल्पित हैं। इन सभी ने संन्यास की कठिन शिक्षा हासिल कर राष्ट्र व समाज सेवा को अपना पूरा जीवन योगर्षि स्वामी रामदेव जी महाराज को अर्पण कर दिया है। संन्यास दीक्षा लेने वालों में ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य, वाल्मीकि, दलित और वनवासी समाज के सेवाव्रती शामिल हैं। श्रद्धेय स्वामी जी महाराज ने कहा कि पतंजलि वर्णव्यवस्था से उपर राष्ट्र निर्माण का कार्य कर रही है। पतंजलि योगपीठ के महामंत्री पूज्य आचार्य श्री ने कहा कि यह अनुष्ठान आने वाले कई हजार वर्ष तक वैदिक युग की पुनः प्रतिष्ठा के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

-साभारः दैनिक जागरण

ऋषि-मुनियों के उत्तराधिकारियों की चिंता

श्रद्धेय स्वामी जी महाराज ने अनौपचारिक बातचीत में कहा कि उन्हें पतंजलि योगपीठ के उत्तराधिकारी से ज्यादा देश की ऋषि-मुनि परम्परा के उत्तराधिकारियों की चिंता सता रही है।

सेवाव्रतियों के लिए सौ से ज्यादा पर्ण कुटिया

 

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