पतंजलि विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्त्वाधान में आयोजित ज्ञान कुम्भ की विशिष्ठ अभिव्यक्तियाँ

पतंजलि विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्त्वाधान में आयोजित ज्ञान कुम्भ की विशिष्ठ अभिव्यक्तियाँ

महंत योगी आदित्यनाथ जी, माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश: ज्ञान कुम्भ के आयोजन के लिए पतंजलि विश्वविद्यालय निश्चित ही अभिनन्दन का पात्र है। शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए सर्वप्रथम हमें भारतीय वैदिक परम्परा और ज्ञान में शोध करके व्यावहारिकता को जोड़ना होगा। भारत की महान् परम्परा होने के बावजूद आज का शिक्षित नौजवान असहाय है, इसका मुख्य कारण अकर्मण्यता है। योगर्षि स्वामी रामदेव जी महाराज ने महर्षि पतंजलि की योग की परम्परा व भारतीय अध्यात्म परम्परा को विश्व मंच पर स्थापित किया है। प्राचीन ज्ञान के पाण्डुलिपियों को संरक्षित करने…

महंत योगी आदित्यनाथ जी, माननीय मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश:

ज्ञान कुम्भ के आयोजन के लिए पतंजलि विश्वविद्यालय निश्चित ही अभिनन्दन का पात्र है। शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए सर्वप्रथम हमें भारतीय वैदिक परम्परा और ज्ञान में शोध करके व्यावहारिकता को जोड़ना होगा।
भारत की महान् परम्परा होने के बावजूद आज का शिक्षित नौजवान असहाय है, इसका मुख्य कारण अकर्मण्यता है। योगर्षि स्वामी रामदेव जी महाराज ने महर्षि पतंजलि की योग की परम्परा व भारतीय अध्यात्म परम्परा को विश्व मंच पर स्थापित किया है। प्राचीन ज्ञान के पाण्डुलिपियों को संरक्षित करने का बड़ा कार्य पतंजलि योगपीठ के माध्यम से किया गया है। आचार्यकुलम् व वैदिक गुरुकुलम् के माध्यम से प्राचीन गुरुकुलीय परम्परा को पुनर्जीवित करने का कार्य श्रद्धेय स्वामी जी महाराज ने किया है। कुम्भ भारतीय संस्कृति की दुनिया को अमूल्य देन है। हमें भारतीय मनीषियों के प्राचीन ज्ञान को आत्मसात करना होगा। उच्च शिक्षा में मौलिक सिद्धांतों की कमी के चलते देश के कई विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राऐं गलत दिशा में जा रहे हैं। इसके लिए हमें ज्ञानकुम्भ जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में निश्चित ही गुणात्मक सुधार करने होंगे। कुछ लोग राम जन्मभूमि का प्रमाण माँगते हैं। यह प्रमाण माँगना हमारी गलत शिक्षा नीतियों का ही परिणाम है। राम हमारी आस्था और विश्वास का सबसे बड़ा प्रमाण हैं। प्रयागराज में आगामी महाकुम्भ-2019 में आप सभी आमंत्रित हैं।

श्रीमती बेबी रानी मौर्य, माननीय राज्यपाल, उत्तराखण्ड:

ज्ञानकुम्भ का उद्देश्य शैक्षिक परिदृश्य में व उच्च शिक्षा में गुणवत्ता परक सुधार लाना है। भारतवर्ष जिन कार्यों के लिए जाना जाता है उसके लिए विशेष विचार-विमर्श इस कार्यक्रम के माध्यम से किया जाएगा। भारत में गुरु की महत्ता ईश्वर से भी बढ़कर बताई हैं भारत में नालंदा जैसे विश्वविद्यालयों में विश्व भर से विद्यार्थी ज्ञानार्जन के लिए आते थे। हमें इस ज्ञान की परम्परा को पुनः स्थापित करना है। आज तकनीक का समय है। शिक्षा में भी तकनीक का प्रयोग करते हुए पाठ्यक्रमों को भी लगातार अपडेट करने की आवश्यकता है।

योगर्षि स्वामी रामदेव जी महाराज, पतंजलि योगपीठ:

इस महान् अवसर पर महामहिम राष्ट्रपति महोदय के सान्निध्य ने हम सबको कृतार्थ किया है। सांख्य दर्शन में एक सूत्र है- ज्ञानान्मुक्तिः अर्थात् ज्ञान से मुक्ति होती है और यही इस ज्ञानकुम्भ का ध्येय वाकय (स्लोगन) है। इस राष्ट्र और विश्व में अज्ञान, बेरोजगारी, दुःख, दरिद्रता व जो भी अशुभ है उससे मुक्ति का मंत्र ज्ञान है और इस ज्ञानकुम्भ के द्वारा राष्ट्र नये प्रकाश का आरोहण पाएगा। जैसे योग की क्रान्ति की है, वैसे ही अब ज्ञानकुम्भ के द्वारा पूरे विश्व को फिर से ज्ञान के प्रकाश से प्रकाशित करना है और भारत को पुनः गौरवमय स्थान दिलाना है।

माननीय योगी जी ने देश की संस्कृति का गौरव बढ़ाया है। योगी जी के द्वारा व वेद गौरवान्वित हो रहे हैं। वे कर्मयोगी, राष्ट्रयोगी व राजयोगी हैं। संस्कृत मात्र भाषा नहीं, अपितु भारत की संस्कृति व पहचान है। संस्कृत के जो गौरव मिलना चाहएि, उसके लिए योगी जी से बहुत अपेक्षाएँ हैं। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का इंतजार देश की जनता बहुत कर चुकी, अब उत्तर प्रदेश के सभी सांसद एकजुट होकर निजी बिल लेकर आए ताकि अयोध्या में राम मंदिर बनने का मार्ग प्रशस्त हो सके। संसद में इस बिल का विरोध हो सकता है, विपक्ष हो सकता है, किन्तु राम का कोई विपक्ष नहीं हैं।

श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी, माननीय मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड:

प्रदेश में ज्ञानकुम्भ का आयोजन एक ऐतिहासिक पहल है, निश्चित रूप से ज्ञानकुम्भ के माध्यम से देश की सभी शिक्षा संस्थाओं के लिए अमृत का मंथन होगा। हमारी शैक्षिक संस्थाओं व भावी पीढ़ी का दीर्घकाल तक मार्गदर्शन कर सके, ऐसा मंथन किया जाएगा। 903 विश्वविद्यालयों में 39 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में है। 29 हजार विश्वविद्यालयों में से अधिकांश में शोधपरक अध्ययन नहीं हो रहा है। अतः उच्च शिक्षा को आधुनिक और भविष्य की आवश्यकताओं के अनुसार ढ़ालने की आवश्यकता है।

परम श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज, पतंजलि योगपीठ:

प्रदेश का पहला ज्ञानकुम्भ पतंजलि की भूमि से हुआ इसका हमें गर्व है। ज्ञानकुम्भ में गुणात्मक शिक्षा, राष्ट्र निर्माण, उच्च शिक्षा, नैतिक शिक्षा आदि विषयों पर गहन मंथन किया गया। ज्ञानकुम्भ के सात सत्रों में यह विमर्श किया गया कि हमारी शिक्षा कैसी हो। मैं कहता हूँ कि माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी जी और स्वामी जी महारजा जैसा योगी तैयार कर सके, ऐसी हमारी शिक्षा होनी चाहिए। राष्ट्र सेवा व संस्कृति के लिए इन दोनों महापुरुषों ने अपना सम्पूर्ण जीवन लगा दिया।

श्री धन सिंह रावत जी, माननीय उच्च-शिक्षा मंत्री, उत्तराखण्ड:

पहली बार प्रदेश में ज्ञानकुम्भ का आयोजन हो रहा है जिसमें माननीय राष्ट्रपति जी का सान्निध्य पाकर हम धन्य अनुभव कर रहे हैं। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता के लिए विचार मंथन किया गया जिससे निश्चित ही देश की शिक्षा को नई दिशा मिलेगी। ज्ञानकुम्भ में शिक्षा में गुणात्मक सुधार हेतु हमने ठोस पहल की है। उत्तराखण्ड सरकार योग, वेद व संस्कृत सभी विश्वविद्यालय में लागु करने जा रही है। प्रदेश में गरीब शोधार्थियों के लिए निःशुल्क शोध व्यवस्था की जाएगी जिसमें पतंजलि की महत्त्वपूर्ण भूमिका रहेगी। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के बाद इस देश का भविष्य यदि सुरक्षित है तो वह केवल योगी जी के हाथों में ही सुरक्षित है। देश में योगी जी की स्वीकार्यता अद्वितीय है। ज्ञानकुम्भ कार्यक्रम के आयोजन में माननीय मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत जी तथा श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज की भूमिका अद्वितीय है।

 

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