आयुर्वेदिक औषधी विस्तार : मेडिसिन के दर्जे को जुटी पतंजलि….

अभी तक विश्व में कहीं भी नहीं मिली आयुर्वेदिक दवाओं को मान्यता । हरिद्वार। (25 अप्रैल, 2019)। योगर्षि स्वामी रामदेव जी महाराज की पतंजलि योगपीठ आयुर्वेदिक दवाओं को मेडीसिन का दर्जा मिलाने में जुट गई है। साथ ही प्राकृतिक चिकित्सा को भी यह दर्जा दिलाया जाएगा। पतंजलि योगपीठ के अनुसंधान विभाग ने वे सभी रिपोर्ट परीक्षणों के बाद तैयार कर ली है, जो ऐसे दर्जे के लिए आवश्यक है। गौरतलब है कि पतंजलि की अनुसंधान प्रयोगशाला मंे आयुर्वेदिक दवाओं के क्लीनिकल ट्रायल लम्बे अर्से से चल रहे हैं। खरगोश, मछली,…

  • अभी तक विश्व में कहीं भी नहीं मिली आयुर्वेदिक दवाओं को मान्यता ।

हरिद्वार। (25 अप्रैल, 2019)। योगर्षि स्वामी रामदेव जी महाराज की पतंजलि योगपीठ आयुर्वेदिक दवाओं को मेडीसिन का दर्जा मिलाने में जुट गई है। साथ ही प्राकृतिक चिकित्सा को भी यह दर्जा दिलाया जाएगा। पतंजलि योगपीठ के अनुसंधान विभाग ने वे सभी रिपोर्ट परीक्षणों के बाद तैयार कर ली है, जो ऐसे दर्जे के लिए आवश्यक है। गौरतलब है कि पतंजलि की अनुसंधान प्रयोगशाला मंे आयुर्वेदिक दवाओं के क्लीनिकल ट्रायल लम्बे अर्से से चल रहे हैं। खरगोश, मछली, चूहा, बिल्ली आदि जन्तुओं में रोगों के जीवाणु छोड़कर फिर उनका इलाज आयुर्वेदिक औषधियांे, जड़ी-बूटियों, भस्मों और रसायनों से किया जा रहा है। प्रत्येक अनुसंधान की रिपोर्ट उसी मानक पर तैयार की जा रही है, जिस मानक पर एलोपैथिक दवाओं का मेडिसिन की मान्यता मिली है। योगपीठ के महामंत्री पूज्य आचार्य बालकृष्ण जी महाराज ने बताया कि भारत में हजारों वर्षों से ऋषि मुनियों ने प्रकृति से आयुर्वेद का ज्ञान हासिल किया है। भारत सरकार और प्रदेश सरकारों के अनेक आयुर्वेद विश्वविद्यालय डिग्रियाँ प्रदान करते हैं, मगर दुनिया में इन औषधियों को मेडिसिन की मान्यता नहीं दी जाती। इसी प्रकार प्राकृतिक चिकित्सा को सारी दुनिया में अपनाया गया है, किन्तु यह चिकित्सा पद्धति भी औषधीय गुणों के बावजूद मेडिसिन की मान्यता नहीं प्राप्त कर सकी है। उन्होंने बताया कि आयुर्वेदिक दवाओं को विश्व स्तर पर मान्यता दिलाने के लिए पतंजलि योगपीठ वचनबद्ध है। अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों के साथ-साथ विश्व स्वास्थ्य संगठन को भी अनुसंधान प्रयोगशाला में किए गये प्रयोगों की जानकारी दी जाएगी। श्रद्धेय स्वामी जी महाराज का मकसद है कि जिस प्रकार योग को अंतर्राष्ट्रीय योग-दिवस की मान्यता मिली है, उसी प्रकार आयुर्वेदिक दवाओं को भी पूरी दुनिया मेडीसिन का दर्जा प्रदान करें।

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