हमारी ऋषि परम्परा गुरु परम्परा वेद परम्परा व सनातन आर्य वैदिक परम्परा में जीने वाले अपने जीवन का दिव्य आरोहण कर रहे हैं -पूज्य स्वामी जी महाराज

हमारी ऋषि परम्परा गुरु परम्परा वेद परम्परा व सनातन आर्य वैदिक परम्परा में जीने वाले अपने जीवन का दिव्य आरोहण कर रहे हैं -पूज्य स्वामी जी महाराज

हमारी ऋषि परम्परा गुरु परम्परा वेद परम्परा व सनातन आर्य वैदिक परम्परा में जीने वाले अपने जीवन का दिव्य आरोहण कर रहे हैं -पूज्य स्वामी जी महाराज   गुरु पुर्णिमा : पतंजलि योगपीठ में ज्ञान परम्परा के साथ मनाया गया गुरु पूर्णिमा पर्व   गुरुओं का आशीर्वाद कल्याणकारी ज्ञानवर्धक है -श्रद्धेय आचार्य श्री   हरिद्वार। पतंजलि योगपीठ के योग भवन सभागार में गुरु पूर्णिमा पर्व ऋषि ज्ञान परम्परा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर पूज्य स्वामी जी महाराज व श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज ने श्रद्धेय गुरुवर आचार्य प्रद्युम्न…

हमारी ऋषि परम्परा गुरु परम्परा वेद परम्परा व सनातन आर्य वैदिक परम्परा में जीने वाले अपने जीवन का दिव्य आरोहण कर रहे हैं -पूज्य स्वामी जी महाराज

 

गुरु पुर्णिमा : पतंजलि योगपीठ में ज्ञान परम्परा के साथ मनाया गया गुरु पूर्णिमा पर्व

 

गुरुओं का आशीर्वाद कल्याणकारी ज्ञानवर्धक है -श्रद्धेय आचार्य श्री

 

हरिद्वार। पतंजलि योगपीठ के योग भवन सभागार में गुरु पूर्णिमा पर्व ऋषि ज्ञान परम्परा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर पूज्य स्वामी जी महाराज व श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज ने श्रद्धेय गुरुवर आचार्य प्रद्युम्न जी महाराज का अभिवादन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। कार्यक्रम में पूज्य स्वामी जी महाराज ने कहा कि पतंजलि की ज्ञान परम्परा के रूप में आचार्यकुलम् पतंजलि गुरुकुलम् व वैदिक गुरुकुलम् के विद्यार्थी उपस्थित हैं। उन्होंने समस्त विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि आपको योग निष्ठ के साथ-साथ गुरु निष्ठ भी रहना हैं श्रद्धेय स्वामी जी महाराज ने कहा- ‘‘ज्ञान परम्परा हमारी आत्मा है, हमंे अपने गुरु, परम्परा, ऋषि परम्परा व ज्ञान परम्परा पर गौरव होना चाहिए’’।

श्रद्धेय स्वामी जी महाराज ने पतंजलि गुरुकुलम् के बाल ब्रह्मचारियों तथा वैदिक गुरुकुलम् के अंतर्गत विद्या अर्जन करने वाले ऋषि कुमार भाईयों व बहनों का अभिनन्दन किया। उन्होंने कहा कि हमारी ऋषि परम्परा, गुरु परम्परा, वेद परम्परा तथा सनातन आर्य वैदिक परम्परा में जीने वाले आचार्य, ब्रह्मचारी भाई बहन अपने ऋषि पूर्वजों की परम्परा को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके भीतर अपने गुरुओं व पूर्वजों के प्रति पूर्ण निष्ठा है। वे उनके प्रतिनिधि बनकर अपने जीवन को आगे बढ़ा रहे हैं तथा अपने जीवन का दिव्य आरोहण कर रहे हैं।

इस अवसर पर श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज ने कहा कि गुरु का आशीर्वाद सबके लिए कल्याणकारी व ज्ञानवर्द्धक है, इसलिए पूर्ण निष्ठा व श्रद्धा भाव से गुरुजनों का आशीर्वाद प्राप्त करना चाहिए।

भारतीय परम्परा में माता को भी गुरु का स्थान दिया गया हैं क्योंकि जन्म के पश्चात अबोध बालक को जीवन जीने का गूढ़ रहस्य सर्वप्रथम माता ही बताती है। कार्यक्रम में पूज्य स्वामी जी महाराज तथा श्रद्धेय आचार्य श्री महाराज ने पूज्य माता गुलाब देवी जी से आशीर्वाद प्राप्त किया।

ज्ञात हो कि गुरु पूर्णिमा का पर्व आषाढ़ शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को श्रद्धाभाव व उत्साहपूर्वक मनाया जाता है। यह पर्व जीवन में गुरु ही महत्ता को समर्पित है। भारतवर्ष में कई विद्वान गुरु हुए हैं, किन्तु महर्षि वेद व्यास प्रथम विद्वान थे, जिन्होंने सनातन धर्म (हिंदू धर्म) के चारों वेदों की व्याख्या की थी। ऐसी मान्यता है कि आषाढ़ पूर्णिमा को आदि गुरु वेद व्यास का जन्म हुआ था। उनके सम्मान में ही आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। कार्यक्रम में साध्वी देवप्रिया, बहन ऋतंभरा, स्वामी परामार्थ देव, बहन अंशुल, बहन पारुल, डाॅ. जयदीप आर्य, भाई राकेश कुमार, बहन साधना आदि ने गुरु सत्ता से आशीर्वाद प्राप्त किया।

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