राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस :   प.पूज्य आचार्य जी महाराज ने दिया सभी को निरोगी जीवन का संदेश

राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस :   प.पूज्य आचार्य जी महाराज ने दिया सभी को निरोगी जीवन का संदेश

पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति परम पूज्य आचार्य जी महाराज ने प्राकृतिक चिकित्सा के उपासकों एवं चिकित्सकों को मार्गदर्शन देते हुए सबके निरामय जीवन का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में पतंजलि अनुसंधान संस्थान के द्वारा पांच सौ से अधिक शोध-पत्र विश्व प्रसिद्ध एवं समीक्षित शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं।

हरिद्वार। छठे प्राकृतिक चिकित्सा दिवस के अवसर पर आयुष मंत्रालय, राष्ट्रीय योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा अनुसंधान परिषद्, राष्ट्रीय प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान एवं पतंजलि विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में पतंजलि में दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारम्भ हुआ। समग्र स्वास्थ्य के लिए प्राकृतिक चिकित्साविषय पर आयोजित इस सम्मेलन में पतंजलि विवि के कुलाधिपति योगऋषि परम पूज्य स्वामी जी महाराज ने उद्बोधन किया।
  पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलपति परम पूज्य आचार्य जी महाराज ने प्राकृतिक चिकित्सा के उपासकों एवं चिकित्सकों को मार्गदर्शन देते हुए सबके निरामय जीवन का संदेश दिया। उन्होंने बताया कि योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में पतंजलि अनुसंधान संस्थान के द्वारा पांच सौ से अधिक शोध-पत्र विश्व प्रसिद्ध एवं समीक्षित शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुके हैं। केन्द्रीय आयुष मंत्री माननीय श्री सर्बानन्द सोनोवाल जी ने वीडियों संदेश के माध्यम से उपस्थिति प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए प्राकृतिक चिकित्सा को जीवन जीने की एक कला बताया। मुख्य अतिथि के रूप में आयुष सचिव पद्मश्री वैद्य राजेश कुटेचा जी ने अपने सम्बोधन के क्रम में प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में भारत सरकार के प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में अनुसंधान के साथ-साथ शिक्षण एवं प्रशिक्षण का अनन्त अवसर है। इस अवसर पर उप-महानिदेशक, आयुष मंत्रालय सत्यजीत पाल ने महात्मा गांधी का प्राकृतिक चिकित्सा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान की व्याख्या की। एस.व्यासा विवि बैंगलोर के कुलाधिपति पद्मश्री डॉ. एचआर नागेन्द्र जी ने प्रतिभागियों का मार्गदर्शन करते हुए प्राकृतिक चिकित्सा के तात्कालिक, दीर्घकालिक प्रभाव विषय पर उद्बोधन दिया।
     पतंजलि विवि के प्रति-कुलपति प्रो.महावीर अग्रवाल ने कहा कि प्रकृति ऊर्जा का दिव्य स्त्रोत है तथा इसे चिकित्सा पद्धति के रूप में अनुप्रयोग कर समग्र स्वास्थ्य को प्राप्त किया जा सकता है। सीसीआरवाईएन के प्रमुख डाॅ.राघवेन्द्र राव, डॉ. नाकेन्द्र नीरज, डॉ. अनुराग वाष्र्णेय, साध्वी देवप्रिया, स्वामी परमार्थदेव, डाॅ.मंजूनाथ ने भी तकनीकी सत्रों में अपने विचार रखे।

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