कृषि के स्वदेशीकरण से किसान होगा समृद्ध

सम्पूर्ण देश में कृषि व ऋषि संस्कृति को बचाने के लिए पतंजलि एक बड़ा कार्य कर रहा है, आज जहाँ घर हाॅस्पिटल बन चुके हैं, पूरे देश में धरती का अन्नदाता किसान महंगे रसायनों से दरिद्र हो रहा है, वहीं जलवायु, मिट्टी, अन्न व पशुओं का चारा भी प्रदूषित व जहरीला हो रहा है। कृषि में बढ़ रहे रसायनों के प्रयोग से कैंसर जैसे भयानक रोगों से ग्रसित रोगियों की संख्या में निरन्तर वृद्धि हो रही है। 135 करोड़ आबादी वाले देश में लगभग 80 प्रतिशत जनता कृषि या इससे…

सम्पूर्ण देश में कृषि व ऋषि संस्कृति को बचाने के लिए पतंजलि एक बड़ा कार्य कर रहा है, आज जहाँ घर हाॅस्पिटल बन चुके हैं, पूरे देश में धरती का अन्नदाता किसान महंगे रसायनों से दरिद्र हो रहा है, वहीं जलवायु, मिट्टी, अन्न व पशुओं का चारा भी प्रदूषित व जहरीला हो रहा है।

कृषि में बढ़ रहे रसायनों के प्रयोग से कैंसर जैसे भयानक रोगों से ग्रसित रोगियों की संख्या में निरन्तर वृद्धि हो रही है। 135 करोड़ आबादी वाले देश में लगभग 80 प्रतिशत जनता कृषि या इससे जुड़े व्यवसाय में शामिल है, किन्तु रासायनिक कृषि की होड़ में देश का अन्नदाता किसान आज दीनहीन, पराश्रित, मजदूर बनकर रहा गया है। कहीं खाद के नाम पर, कहीं दवाईयों के नाम पर तो कहीं कृषि संसाधनों व उपकरणों के नाम पर उसे लूटा जा रहा है। किसानों की इन्हीं समस्याओं को लेकर प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के तहत पतंजलि ने एक परियोजना तैयार की है। इस योजना के अंतर्गत पतंजलि बायो रिसर्च इंसटीट्यूट के तत्वावधान मंे चार दिवसीय ‘पतंजलि कृषक समृद्धि कार्यक्रम’ का आयोजन किया गया। इसमें पतंजलि जैव अनुसंधान संस्थान (पीबीआरआई), भारतीय कृषि कौशल विकास परिषद् (एएससीआई), राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) के मध्य अनुबोधक पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर हुए। हमने भाभा एटाॅमिक रिसर्च इंस्टीट्यूट तथा पी.बी.आर.आई. के सहयोग से विकसित ‘सीता मृदा परीक्षण किट’ को भी लांच किया है। साथ ही जैविक कृषि पर आधारित एक पुस्तिका ‘मिट्टी की ताकत बढ़ जाये, हर खेत लहलहाए’ का भी विमोचन किया गया।

पूरी दुनिया के सभी क्षेत्रों में अभिनव क्रान्ति हो रही है। माननीय प्रधानमंत्री जी का लक्ष्य 2022 तक किसानों की आय को दोगुना करना है, जिसके तहत यह एम.ओ.यू. किया गया है। यह किसानों के स्वावलम्बन की अभिनव योजना है जिसमंे राष्ट्रीय कौशल विकास निगम, कौशल विकास एवं उद्यम मंत्रालय, भारतीय कृषि कौशल परिषद् के सहयोग व मार्गदर्शन में विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य किसानों की आय को दोगुना करना, जैविक खेती का प्रशिक्षण व प्रोत्साहन, खेतों में व्यावहारिक कृषि प्रयोगशालाएं स्थापित करना व पूरे देश में किसानों को स्वावलम्बी बनाना है।

श्रद्धेय स्वामी जी महाराज का दिव्य संकल्प है कि किसान पहले कुदरती खेती अपने परिवार के लिए तथा बाद में व्यापार के संकल्प के साथ इस अभियान को प्रारम्भ करें तथा सभी कृषक योग से जुड़कर रोगमुक्त, तनावमुक्त, व्यसनमुक्त एवं समस्त प्रकार के दुःख व दरिद्रता से मुक्त जीवन जीएं। जो व्यक्ति योग करेगा उसकी दुगुनी आय तो स्वतः हो जायेगी क्योंकि उसके जीवन में कोई बीमारी एवं बुराई नहीं होगी। किसानों की आमदनी का लगभग आधा हिस्सा बीमारियों, बुराईयों एवं वैर-विरोध या लड़ाई झगड़ों में बर्बाद हो जाता है, योगी इन दोषों से दूर रहता है। आइये! सभी योगव्रती, गोव्रती एवं स्वदेशीव्रती बनकर एक आदर्श दिव्य जीवन जीनेका संकल्प लें और पतंजलि के साथ जुड़कर हम सभी एक स्वस्थ, समृद्ध, दिव्य व भव्य भारत बनाएँ।

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