आयुर्वेद की शक्ति कभी कम नहीं थी, हमारी सोच कमजोर थी: श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज

आयुर्वेद की शक्ति कभी कम नहीं थी, हमारी सोच कमजोर थी: श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज

‘इंडिया टुडे काॅन्क्लेव ईस्ट’ कार्यक्रम में श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज ने आयुर्वेद, सेहत और बीमारियों से जुड़े कई सवालों के जवाब दिये। नयी दिल्ली, 06 दिसम्बर। इंडिया टुडे ग्रुप के लोकप्रिय और चर्चित कार्यक्रम ‘इंडिया टुडे काॅन्क्लेव ईस्ट 2019’ का आयोजन कोलकाता में हुआ। दो दिन चले इस कार्यक्रम में अलग-अलग क्षेत्र की जानीमानी हस्तियाँ शामिल हुई। काॅन्क्लेव में ‘आयुर्वेद कैसे आपको फिट रख सकता है?’ विषय पर चर्चा के लिए पतंजलि आयुर्वेद के को-फाउंडर पूज्य आचार्य श्री शामिल हुए। इस अवसर पर पूज्य आचार्य श्री ने बताया कि…

‘इंडिया टुडे काॅन्क्लेव ईस्ट’ कार्यक्रम में श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज ने आयुर्वेद, सेहत और बीमारियों से जुड़े कई सवालों के जवाब दिये।

नयी दिल्ली, 06 दिसम्बर। इंडिया टुडे ग्रुप के लोकप्रिय और चर्चित कार्यक्रम ‘इंडिया टुडे काॅन्क्लेव ईस्ट 2019’ का आयोजन कोलकाता में हुआ। दो दिन चले इस कार्यक्रम में अलग-अलग क्षेत्र की जानीमानी हस्तियाँ शामिल हुई। काॅन्क्लेव में ‘आयुर्वेद कैसे आपको फिट रख सकता है?’ विषय पर चर्चा के लिए पतंजलि आयुर्वेद के को-फाउंडर पूज्य आचार्य श्री शामिल हुए। इस अवसर पर पूज्य आचार्य श्री ने बताया कि हम सब जानते हैं कि आयुर्वेद शब्द की उत्पत्ति संस्कृत से हुई है, ‘आयु सो वेदा’ अर्थात् आयुर्वेद। हमारा जो जीवन है, स्वास्थ्य है उसके विषय में जो हमें बहुत गहराई से बताता है, वह आयुर्वेद है।
              पूज्य आचार्य श्री ने कहा कि मुस्लिम शासकों का दौर रहा तो यूनानी चिकित्सा पद्धति को प्रश्रेय मिला, अंग्रेजों ने माॅडर्न मेडिसिन सिस्टम पर जोर दिया, किन्तु इस कालखण्ड में आयुर्वेद उपेक्षित रहा या कहें तो आयुर्वेद पर उतना ध्यान नहीं दिया गया। आयुर्वेद की पहचान भारत से होते हुए भी यह वैकल्पिक चिकित्सा के रूप में प्रयोग होता रहा। किन्तु जब विदेशों में लोगों ने देखा कि हर्बल मेडिसिन में कितनी ताकत है, प्राकृतिक चीजों में कितना दम है तब जाकर देश के लोगों का ध्यान घूम-फिर कर आयुर्वेद की ओर लौटा। आयुर्वेद की शक्ति कभी कम नहीं थी, हमारी सोच कमजोर थी। पश्चिमी देशों के कारण पुनः वह सोच लौटकर आई है। उन्होंने कहा कि मुझे प्रसन्नता है कि आयुर्वेद को पुनः पहचान दिलाने में पतंजलि व श्रद्धेय स्वामी जी महाराज का बड़ा योगदान है। आज पूरा देश व दुनिया आयुर्वेद की ओर लौट रही है, यह भारत के लिए गर्व की बात है। काॅन्क्लेव में पूज्य आचार्य श्री से आयुर्वेद, सेहत और बीमारियों से जुड़े कई सवाल किए गए और श्रद्धेय आचार्य श्री ने सभी सवालों का बेबाकी से जवाब दिया।

हर दिन आयुर्वेद से 50 हजार लोगों का इलाज करता है पतंजलि- 

            पूज्य आचार्य श्री ने कहा कि श्रद्धेय स्वामी जी महाराज ने योग को घर-घर पहुँचाया, उससे पहले योग योगा था और आज पतंजलि के माध्यम से पूरे देश में लगभग एक लाख रेगुलर कक्षाएं निःशुल्क चलती हैं। पतंजलि में भी दुनिया के 80 देशों के लोग चिकित्सा के लिए आते हैं। पतंजलि ने दुनियाभर के लोगों का इलाज किया। आज भी हम हर दिन 50 हजार से ज्यादा लोगों का इलाज करते हैं। पतंजलि के पूरे देश में 1500 चिकित्सालय हैं जहाँ रोगियों को निःशुल्क चिकित्सकीय परामर्श प्रदान किया जाता है। श्रद्धेय स्वामी रामदेव जी महाराज के योग और पतंजलि के आयुर्वेद का मिश्रण लोगों को सेहत प्रदान कर रहा है।

सिर्फ पतंजलि ने खोजे हैं 62 हजार मेडिशिनल प्लांट्स-

              पूज्य आचार्य बालकृष्ण जी महाराज ने कहा कि जब हम आयुर्वेद में रिसर्च की बात करते हैं तो पता चलता है कि भारत और पूरी दुनिया में जो रिसर्च आयुर्वेद में होना चाहिए था वह नहीं हो रहा है। दुनियाभर में 3.60 लाख प्रजातियों के पौधे हैं लेकिन किसी ने भी यह पता नहीं किया इसमें कितने औषधीय पौधे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस कार्य की शुरूआत की थी किन्तु 2010 में उन्होंने इसे बीच में ही छोड़ दिया। फिर यह काम पतंजलि ने शुरू किया है। पतंजलि ने इकलौती चेकलिस्ट बनाई है जो यह बताती है कि देश और दुनिया में करीब 62 हजार मेडिशिन प्लाट््ंस हैं। इन पौधों पर अभी रिसर्च बाकी है, कुछ पर पतंजलि अनुसंधान संस्थान के माध्यम से शोध किया जा रहा है।

आयुर्वेद में कैंसर और डायबिटीज का इलाज संभव-

             सेशन में पूज्य आचार्य बालकृष्ण जी महाराज से पूछा गया कि क्या आयुर्वेद में कैंसर और डायबिटीज का इलाज संभव है? इसके जवाब में श्रद्धेय आचार्य श्री ने बताया कि कैंसर जैसी गम्भीर बीमारी पर पतंजलि में काफी शोध कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आयुर्वेदिक दवाओं का क्लीनिकल ट्रायल न होने की वजह से कैंसर को लेकर अभी तक कोई ऐसी प्रामाणिक दवा नहीं बन पाई है जो 100 प्रतिशत कारगर हो, लेकिन उस पर काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि पतंजलि आयुर्वेद हाॅस्पिटल में कैंसर के हजारों रोगी लाभान्वित हुए हैं। वहीं डायबिटीज के बारे में उनका कहना था कि आयुर्वेदिक तरीकों से आसानी से ब्लड शुगर को कंट्रोल किया जा रहा है।

आयुर्वेद में डेंगू का इलाज-

             श्रद्धेय आचार्य बालकृष्ण जी महाराज ने बताया कि आयुर्वेद मंे डेंगू का इलाज आसानी से किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि आयुर्वेद में गिलोय एक औषधि की तरह काम करता है। गिलोय का जूस पीकर आसानी से डेंगू के प्रभाव को कम किया जा सकता है। पपीते के पत्तों का रस प्लेटलेट्स बढ़ाने में विशेष गुणकारी औषधी है। अभी हाल ही में पपीते के पत्तों के रस, तुलसी व गिलोय इत्यादि से निर्मित आयुर्वेदिक औषधि ‘डेंगूनिल’ के चमत्कारी प्रभाव देखने को मिले हैं।

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