मोदी बोले : झारखण्ड की संस्कृति में रमा हुआ है योग यहाँ तो छऊ नृत्य की मुद्राएँ भी योग सिखाती हैं।

मोदी बोले : झारखण्ड की संस्कृति में रमा हुआ है योग यहाँ तो छऊ नृत्य की मुद्राएँ भी योग सिखाती हैं।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस प्रधानमंत्री ने रांची में ‘‘40 हजार’’ लोगों के साथ योग कर दुनिया को दिया संदेश । योग महोत्सव में मा. प्रधानमंत्री जी ने 13 प्रकार के योग आसन किए और योग को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर दिया। राँची (झारखण्ड)। प्रभात तारा मैदान का विशिष्ट प्रभात। 40 हजार साधकों के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का योगाभ्यास पूरी दुनिया ने देखा, समझा और इसे जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, योग जाति और धर्म से परे है। यही वह माध्यम…

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस प्रधानमंत्री ने रांची में ‘‘40 हजार’’ लोगों के साथ योग कर दुनिया को दिया संदेश ।

  • योग महोत्सव में मा. प्रधानमंत्री जी ने 13 प्रकार के योग आसन किए और योग को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर दिया।

राँची (झारखण्ड)। प्रभात तारा मैदान का विशिष्ट प्रभात। 40 हजार साधकों के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का योगाभ्यास पूरी दुनिया ने देखा, समझा और इसे जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा, योग जाति और धर्म से परे है। यही वह माध्यम है जिससे बीमारी और गरीबी से मुक्ति पाई जा सकती है। इसकी आधुनिक यात्रा शहर से गांव की ओर ले जाने की है।

                अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर प्रातः यहां अलग ही छटा थी। बरसने को उद्दत मेघ के बीच प्रधानमंत्री ने योगाभ्यास से पूर्व आयोजन का मंतव्य समझाया। उन्होंने योग की परम्परा, इसके बेहतरीन प्रयोग और इसके जरिए जीवन स्तर उठाने की अपनी सोच को विस्तार दिया। आदिवासी समाज को योग और प्रकृति से तो झारखण्ड के पारम्परिक छाऊ नृत्य के आसन और मुद्रा को योग से जोड़ा।
बोले, योग की आधुनिक युग की यात्रा शहर से गांव की ओर ले जाने की है। सच्चाई है कि यह यात्रा देश के ग्रामीण और आदिवासी अंचल में अभी उस तरह नहीं पहुंची है, जैसी पहुंचनी चाहिए थी। अब हम सभी को मिलकर इसे शहरों से गांवों की तरफ, जंगलों की तरफ, दूर-सूदूर आखिरी इंसान तक ले जानी है। इसे गरीब और आदिवासी के घर तक पहुंचाना है। उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाना है। योग के जरिये उन्हें बीमारी और गरीबी के चंगुल से बचाना है। उन्होंने कहा, सिर्फ सुविधाओं से जीवन आसान बनाना काफी नहीं है। दवाइयां और सर्जरी का ही समाधान पर्याप्त नहीं है। बीमारी से बचाव के साथ-साथ वेलनेस पर अधिक फोकस होना जरूरी है। यही शक्ति हमें योग से मिलती है। यही भावना येाग की है, पुरातन भारतीय दर्शन की भी है। योग सिर्फ तभी नहीं होता, जब हम आधा घंटा जमीन या मेज पर या दरी पर होते हैं।

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